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सुशांत की मौत से गम में डूबीं रश्मि देसाई, कहा- \"एक समय था जब मैं सुशांत के बहुत करीब थी लेकिन\"

सुशांत सिंह राजपूत के निधन को करीब 25 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी भी सुशांत को लेकर सोशल मीडिया पर सीबीआई जांच की मांग चल रही है। आज फिर ट्विटर पर #CBIForSonOfBihar ट्रेंड कर रहा था। इस हैशटैग के जरिए

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अभिषेक बच्चन के साथ 'ब्रीद: इन टू द शैडोज़' का एक दिलचस्प वीडियो आया सामने

ब्रीद के सबसे बहुप्रतीक्षित दूसरे सीजन 'ब्रीद: इन टू द शैडोज़' की रिलीज़ में 24 घंटे से भी कम समय बचा है, जब इसे आखिरकार अमेज़ॅन प्राइम पर 200 देशों और क्षेत्रों में दुनिया भर में अपने दर्शकों के लिए रिलीज़

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कृष्णा अभिषेक- भारती सिंह ने छोड़ा द कपिल शर्मा शो ! नए शो में दिखेगा जलवा First Look

अनलॅाक के साथ ही कई टीवी शोज की शूटिंग शुरू हो चुकी है। बीते कुछ दिनों से खबर आ रही है कि द कपिल शर्मा शो की शूटिंग शुरू की जाएगी। लेकिन इससे पहले आपको बता दें कि भारती सिंह और

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भाभीजी घर पर हैं के सेट पर हड़कंप, अनीता भाभी की हेयर ड्रेसर कोरोना पॉजिटिव, बड़ा खतरा , Details

कोरोना काल में शूटिंग करना भाभीजी घर पर हैं के मेकर्स के लिए खतरनाक साबित हुआ है। कुछ वीक पहले पूरी सावधानी के साथ भाभीजी घर पर हैं की शूटिंग शुरू हुई। सरकार के दिए गए सभी निर्देश का पालन सेट




प्रौद्योगिकी
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एंड्राइड ऐप बनवाने जा रहे हैं तो ध्यान रखें यह बातें

टेक्नोलॉजी दिन पर दिन बदलती जा रही है और ऐसे में आवश्यक है कि आप बदलती हुई टेक्नोलॉजी के अलग-अलग पहलुओं के बारे में गहराई से ना सही, किंतु बेसिक जानकारी अवश्य रखें।
कोविड-19 के दौर में समूची दुनिया ऑनलाइन शिफ्ट हो रही है। ऐसे में हर कोई ऑनलाइन आना चाहता है और न केवल औपचारिक तौर पर, बल्कि इसके माध्यम से वह व्यवसाय भी करना चाहता है।

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वेबसाइट और सोशल मीडिया के प्रयोग से तो आप पहले ही परिचित हैं और इस लेख में आपको एंड्राइड मोबाइल एप्लीकेशंस के बारे में कुछ जानकारी देंगे, क्योंकि बदले हुए समय में ऐप बनवाने का चलन जोर पकड़ता जा रहा है। 
आइए जानते हैं कुछ जरूरी बातें...
ब्रांडिंग के लिहाज से 'बेसिक वेब व्यू' एप्लीकेशन
जी हां! अगर आपके पास पहले से वेबसाइट है और सिर्फ आपको ब्रांडिंग के लिहाज से एक एप्लीकेशन भर की जरूरत है तो वेब व्यू का ऑप्शन आजमाया जा सकता है। सामान्य तौर पर इसकी डेवलपमेंट भी आसान होती है और अगर आप किसी दूसरे एप डेवलपर से इसे डिवेलप कराना चाहते हैं तो इसकी कॉस्टिंग भी कम आती है।
ऑनलाइन भी कई सारे एप्लीकेशंस हैं, जो मुफ्त में वेब्यु एप्लीकेशंस का निर्माण कर देंगे। हालांकि उसमें उनका एडवर्टाइजमेंट और ब्रांडिंग इंक्लूड रहती है।
इसके बाद आप प्ले स्टोर पर अकाउंट बनाकर एंड्राइड एप्लीकेशन को अपलोड कर सकते हैं।

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नेटिव एप्लीकेशन
इसे आप प्रॉपर एप्लीकेशन मान सकते हैं, जो सामान्य तौर पर आप इस्तेमाल भी करते हैं। 
इसके डेवलपमेंट के लिए आपको किसी ट्रेंड ऐप डेवलपर की सहायता लेनी चाहिए और एक्जैक्टली आप अपने एप्लीकेशन में क्या फैसिलिटी चाहते हैं, इसका प्लान आप निश्चित कर लें। 
तात्पर्य यह कि आपको सिर्फ प्रोडक्ट या सर्विसेज को ही डिस्प्ले कराना है, या फिर आप उसमें यूजर से इंटरेक्शन भी चाहते हैं, इसका ध्यान ऐप डेवलपमेंट स्टार्ट करने से पहले रखना होगा। मोबाइल एप्लीकेशन, वेबसाइट इत्यादि से इस मायने में फायदेमंद है कि अगर कोई यूजर एक बार ऐप इंस्टॉल कर लेता है तो आपके ब्रांड के प्रति यूजर की लॉयल्टी निश्चित रूप से बढ़ जाती है। 
आगे अगर आप अपने एप्लीकेशन में कुछ भी अपडेट करते हैं, कुछ भी पोस्ट करते हैं, कोई भी नई चीज आती है तो उसके पास ना केवल नोटिफिकेशन जाती है, बल्कि वह खुद भी आपके एप्लीकेशन को ब्राउज करता रहता है। इसीलिए प्लानिंग आवश्यक है किसी भी ऐप के निर्माण से पहले!

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नेटिव ऐप में बहुत सारी फैसिलिटी आप ऐड करा सकते हैं, जैसे अगर कोई प्रोडक्ट या सर्विस है तो उसकी वीडियो या फोटो खींचकर सीधे एप्लीकेशन में ही आपका कस्टमर अपलोड कर सकता है, ऑनलाइन ऑर्डर कर सकता है, कोई भी प्रोडक्ट या सर्विस खरीद सकता है, ऑनलाइन पेमेंट हो सकती है। यह सारी सुविधाएं आपको नेटिव ऐप में मिल सकती हैं।
हाइब्रिड एप डेवलपमेंट
डेवलपमेंट की यह नई टेक्निक काफी पॉपुलर हो रही है। चूंकि ऐप डेवलपमेंट के लिए एंड्रॉयड और आईओएस जैसे प्लेटफार्म प्रचलित हैं। ऐसे में अगर आप एंड्राइड के लिए एप्लीकेशन डिवेलप कराते हैं तो उसका सोर्स कोड आईओएस के लिए कार्य नहीं करता है। उसके लिए अलग से प्रोग्रामिंग व डेवलपमेंट की जरूरत पड़ती है, किंतु हाइब्रिड ऐप डेवलपमेंट में आपके एप्लीकेशन की कोडिंग या उसका सोर्स कोड एक ही रहता है और दोनों की आउटपुट फाइल अलग-अलग बन जाती है।
फिर गूगल के प्लेस्टोर व एप्पल के एप स्टोर पर अलग-अलग आउटपुट फाइल अपलोड कर सकते हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, हाइब्रिड एप्लीकेशन डेवलपमेंट वर्तमान में काफी पॉपुलर ही रहा है, क्योंकि अपेक्षाकृत यह फास्ट भी होता है।

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एप डेवलपमेंट कराने से पहले ऐप की उपयोगिता आपको समझने की कोशिश अवश्य करनी चाहिए। इतना जान लें कि ऑनलाइन बिजनेस में एक तरह से यह क्रांति के जैसा है और आपके बिजनेस को यह काफी दक्षता से बूस्ट कर सकता है, इस बात में दो राय नहीं है।
-मिथिलेश कुमार सिंह

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गूगल ड्राइव का प्रयोग नहीं सीखा, तो क्या सीखा?

इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोग गूगल को यूंही 'गूगल देवता' नहीं कहते हैं। एक से बढ़कर एक उपयोगी टूल्स गूगल द्वारा आपको मुफ्त में प्रदान की जाती है। 

शुरुआती यूजर्स के लिए जिनको एक लिमिट तक गूगल द्वारा दी गयी सुविधा का इस्तेमाल करना होता है उन्हें कुछ भी पे नहीं करना होता है। हां, वही जब आप एंटरप्राइज लेवल पर जाते हैं और उसके प्रोडक्ट का एक सीमा के बाद कमर्शियल इस्तेमाल करते हैं तो तो अवश्य कंपनी आपके सामने कई विकल्प रखती है।
 

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बहरहाल, आज हम गूगल की दूसरी सर्विसेज की बजाय इस आर्टिकल में सिर्फ गूगल ड्राइव की बात करेंगे। यह गूगल द्वारा दिया गया यह ऐसा उपहार है, जिसे गंभीरता से ऑनलाइन कार्य करने वाले व्यक्ति अमृत मानते हैं। साधारण भाषा में इसे आप अपने बैंक का लॉकर मान सकते हैं, जिसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है तो इसकी सिक्योरिटी किसी लॉकर से कम नहीं है।

जैसा कि हम सबको पता है कि यह आपके जीमेल से जुड़ा हुआ रहता है जब भी आप जीमेल लॉग इन करते हैं, तो उसी लॉगइन की सहायता से आप जी ड्राइव भी एक्सेस कर सकते हैं।

गूगल ड्राइव में आप ना केवल अपनी मनचाही तस्वीरें, वीडियो या दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट अलग अलग फोल्डर वाइज रख सकते हैं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आप लिंक शेयरिंग के माध्यम से किसी एक व्यक्ति या अधिक व्यक्तियों को पर्टिकुलर डॉक्यूमेंट का एक्सेस भी दे सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि बिना जीमेल का इस्तेमाल किए ही कोई आपके डॉक्यूमेंट को देखें या डाउनलोड कर सके तो इसका रास्ता भी इसमें मौजूद है। 

हालांकि, सिक्योरिटी के लिहाज से यह सिक्योर नहीं होता है। 

आइये शुरू से जानते हैं कि गूगल ड्राइव का इस्तेमाल आप किस प्रकार कर सकते हैं.... 

सर्वप्रथम आप कंप्यूटर में जीमेल लॉग इन करें और ब्राउज़र में दाहिनी ओर गूगल एप्स के कलेक्शन का आइकॉन दिखेगा. उसे क्लिक करते ही गूगल की तमाम सर्विसेज और प्रोडक्ट्स दिखने लगेंगे, जैसे गूगल कैलेंडर, यूट्यूब, गूगल कीप इत्यादि। इन्हीं आइकॉन में आपको ड्राइव का आइकॉन भी दिखेगा, जिसे आपको क्लिक करना है।
इसे आप डायरेक्ट इस लिंक से भी खोल सकते हैं: http://drive.google.com/

जैसे ही आप यह लिंक खोलेंगे आपको लेफ्ट साइड में ड्राइव के मेन्यू दिखने लगेंगे, जिसमें माय ड्राइव और शेयर्ड विद मी के अलावा कुछ और आइकॉन दिखेंगे. 
 

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माय ड्राइव में आप अपने हिसाब से अलग-अलग फ़ोल्डर्स क्रियेट कर सकते हैं, जैसे आप अपने कंप्यूटर में करते हैं। कई लोग बिना सोचे-समझे फोल्डर और फाइल अनमैनेज ढंग से अपलोड कर देते हैं और बाद में कुछ ढूंढना हो तो परेशान हो जाते हैं। हालाँकि, इसमें सर्च आप्शन मौजूद है, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञ यह सुझाव देते हैं कि आप अपनी ज़रूरत के अनुसार फोल्डर और सब-फोल्डर क्रिएट करें और उसके अनुरूप फाइल्स को ड्राइव में सहेजें।

शुरुआत से जितने बेहतर ढंग से आप फाइल्स को सहेजेंगे, उतनी ही कम उलझन आपको होगी और आप इसका इस्तेमाल करने के प्रति प्रेरित भी होंगे।

इसी प्रकार 'शेयर्ड विद मी' लिंक पर आपको उन फाइल्स / फ़ोल्डर्स का एक्सेस मिलता है, जो दूसरों ने आप के साथ शेयर किया होता है।

सामान्य तौर पर यहाँ फाइल्स बिखरी हुई होती हैं, किन्तु ख़ास बात यह है कि आप इन्हें भी सहेज सकते हैं।

इसके लिए आपसे शेयर की गयी फाइल्स पर राईट क्लिक करना होता है और वहां मौजूद तमाम ऑप्शन में Move to का इस्तेमाल करना होता है।

अगर यह कार्य नहीं करता है तो राईट क्लिक करने पर ही Add Shortcut to Drive का ऑप्शन आपको दिखता है। इसका इस्तेमाल आपको, आपसे शेयर की गयी फाइल्स को सहेजने में काफी मदद कर सकता है।

तीसरी जो सबसे महत्वपूर्ण चीज है, वह है फाइल शेयरिंग!

इसके लिए आपको थोड़ा सावधानी बरतने की ज़रुरत है और इसमें दिए गए ऑप्शन को ठीक से समझने की ज़रुरत है।
 

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सबसे पहले आपको गूगल ड्राइव से जो फाइल शेयर करनी होती है, उस पर राईट क्लिक करना होता है। तत्पश्चात, दिए गए ऑप्शन में शेयर के आप्शन पर क्लिक कीजिये और आपके सामने एक पॉप-अप ओपन हो जायेगा, जिसमें लिखा रहेगा 'Share with people and groups'!

इसमें आप किसी भी व्यक्ति का ईमेल टाइप करके उससे न केवल फाइल शेयर कर सकते हैं, बल्कि उसे व्यूअर, कमेन्टर या एडिटर का राईट दे सकते हैं। यहाँ तक कि उसे उस पर्टिकुलर फाइल/फोल्डर का ओनर भी बना सकते हैं।

अगर आप ईमेल की बजाय लिंक शेयर करना चाहते हैं तो ठीक इसी पॉपअप में Get link का ऑप्शन आप देख पाएंगे। यहाँ पर ज़रुरत के अनुसार अपनी सेटिंग कर सकते हैं।

गूगल की दूसरी सर्विसेज के लिए भी आप गूगल ड्राइव का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

जी हां! वह चाहे आपका गूगल डॉक्स हो, गूगल शीट्स हो, आप गूगल ड्राइव में पर्टिकुलर फोल्डर वाइज गूगल की इन सर्विसेस को भी मेंटेन कर सकते हैं और सुविधा अनुसार खुद उसका इस्तेमाल कर सकते हैं या दूसरे लोगों को सहूलियत के अनुसार एक्सेस दे सकते हैं।
 

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क्लाउड स्टोरेज के लिए गूगल ड्राइव के अलावा मीडिया फायर, पीक्लाउड, माइक्रोसॉफ्ट की वन ड्राइव, सिंक, अमेजन ड्राइव, एप्पल का आई क्लाउड इत्यादि भी मौजूद हैं, लेकिन गूगल ड्राइव तो फिर गूगल ड्राइव ही है।

अगर आपने क्लाउड स्टोरेज के लिए गूगल ड्राइव का इस्तेमाल किया है या करने वाले हैं तो निश्चित रूप से यह आपको एक अमृत सी फीलिंग देगा और आप कह उठेंगे वाह 'गूगल ड्राइव' वाह!

- मिथिलेश कुमार सिंह

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OnePlus ने लॉन्च किए तीन Android TV, कीमत 12,999 रुपये से शुरू, जानिए फीचर्स

OnePlus ने भारत में अपने नए स्मार्ट टीवी लॉन्च कर दिए हैं। वनप्लस के ये नए टीवी काफी किफायती हैं। वनप्लस ने अपनी नई यू सीरीज़ और वाई सीरीज़ स्मार्ट टीवी से पर्दा उठाया है। OnePlus Y सीरीज़ के टीवी मॉडल की कीमत 12,999 रुपये से शुरू होती है, जबकि OnePlus U सीरीज़ में एक मात्र मॉडल है जिसे 49,999 रुपये में बेचा जाएगा। वनप्लस के ये टीवी एंड्रॉयड 9 पाई पर चलते हैं। टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स के मुताबिक OnePlus TV Y सीरीज़ में दो मॉडल हैं। एक 32 इंच मॉडल एचडी रिजॉल्यूशन (1,366x768 पिक्सल) और दूसरा 43 इंच मॉडल फुल-एचडी रिजॉल्यूशन (1,920x1,080 पिक्सल) है। वहीं, OnePlus TV U सीरीज़ का एक मात्र मॉडल 55 इंच वाला है जो अल्ट्रा-एचडी (3840x2160 पिक्सल) स्क्रीन से लैस है।
 

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OnePlus TV 2020 के स्पेसिफिकेशन
- OnePlus TV Y की बात करें तो यह टीवी बजट सेगमेंट के ग्राहकों के लिए लाया गया है। 
- इस टीवी में 32 इंच और 43 इंच के मॉडल हैं। ये स्मार्ट टीवी ऑक्सीजन प्ले, वनप्लस कनेक्ट और कई अनोखे फीचर्स के साथ आते हैं। 
- वहीं, OnePlus TV U सीरीज़ का एक मात्र मॉडल 55 इंच का है। 
- यह 4K एलईडी स्क्रीन और डॉल्बी विज़न एचडीआर सपोर्ट के साथ आता है। 
- OnePlus TV 55U1 की किनारों पर मोटाई 6.9 मिलीमीटर है। स्क्रीन टू बॉडी रेशियो 95 प्रतिशत है। इसके अलावा ऑक्सीजन प्ले और वनप्लस कनेक्ट ऐप स्मूथ कनेक्टिविटी के काम आएंगे। 
- रिमोट से आपको Netflix और Amazon Prime Video का एक्सेस मिलेगा। इनके लिए शॉर्ट कीज़ हैं। इसका इस्तेमाल गूगल असिस्टेंट से बात करने के लिए भी हो सकता है।
- दोनों सीरीज़ के सभी स्मार्ट टीवी Android TV 9 Pie पर चलते हैं। इन्हें गूगल असिस्टेंट, गूगल क्रोमकास्ट और गूगल प्ले स्टोर का एक्सेस मिला है। 
- वनप्लस की वाई सीरीज़ के बारे में 20 वॉट साउंड आउटपुट का दावा है। वहीं, यू सीरीज़ में 30 वॉट वाला चार स्पीकर सेटअप है। इसमें डॉल्बी एटमस ऑडियो के लिए भी सपोर्ट है। 
- इसके अलावा आप टेलीविज़न का इस्तेमाल वायरलेस स्पीकर के तौर पर कर सकते हैं।
 

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OnePlus TV की कीमत
OnePlus TV Y सीरीज के 32 इंच वाले वेरिएंट का दाम 12,999 रुपये है, जबकि 43 इंच वेरिएंट 22,999 रुपये में बिकेगा। वहीं, OnePlus TV U सीरीज़ का एक मात्र मॉडल 49,999 रुपये का है।

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वन प्लस लेकर आया 20 हज़ार से कम में सस्ता स्मार्ट टीवी

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी वन प्लस ने नई स्मार्ट टीवी सीरीज़ लॉन्च कर दिया। इसकी जानकारी कंपनी ने ट्वीट के ज़रिये दी है और साथ ही कुछ टीज़र भी जारी किए हैं। कंपनी ने यह दावा किया है कि इन स्मार्ट टीवी सीरीज़ को अफॉर्डेबल रेंज में लॉन्च किया है। भारत में वन प्लस कंपनी 2 जुलाई को स्मार्ट टीवी लॉन्च कर दिया। ऐसा माना जा रहा है कि इसकी कीमत 20 हज़ार से कम हो सकती है। कम कीमत वाले इस टीवी सीरीज़ को तीन साइज़ में मार्केट में लाया जाएगा। आपको बता दें कि वन प्लस ने पिछले ही साल टीवी सेग्मेंट में एंट्री ली थी और दो हाई-रेंज स्मार्ट टीवी क्यू1 टीवी और क्यू1 प्रो टीवी लॉन्च किए थे। 
 

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वन प्लस स्मार्ट टीवी एक्सक्लूसिवली ई-कॉमर्स साइट अमेज़न पर ही उपलब्ध है और यूज़र्स को इसके लिए प्री-बुकिंग भी की है। किसी भी मॉडल की प्री-बुकिंग करने वाले ग्राहकों को कंपनी की तरफ से दो साल की एक्सटेंडेड वॉरंटी फ्री में मिलेगी। इसके अलावा ग्राहक को 1,000 रुपये का कैशबैक भी प्राप्त होगा, जो कि अमेज़न पे अकाउंट में आ जाएगा। 2 जुलाई से बुकिंग होने वाले इस टीवी को ग्राहक 5 अगस्त से पहले खरीद सकेंगे। 
 
क्या होंगे वनप्लस स्मार्ट टीवी के फीचर्स ? 
कंपनी ने यह दावा किया है कि वन प्लस स्मार्ट टीवी स्मूथ व कलरफुल डिस्प्ले एक्सपीरियंस देंगे। वन प्लस स्मार्ट टीवी में 95 प्रतिशत स्क्रीन-टू-बॉडी का रेशियो दिया जाएगा। टेक एक्सपर्टस के अनुसार वन प्लस स्मार्ट टीवी 32 इंच, 43 इंच और 55 इंच के साइज़ में उपलब्ध किए जाएंगे। इनकी कीमत 19,999 रुपये, 29,999 रुपये और सबसे बड़े मॉडल की कीमत 49,999 रुपये या इससे कम भी हो सकती है। इस टीवी सीरीज़ में 6.9 एमएम की अल्ट्रा थिन बॉडी होगी। साथ ही वन प्लस टीवी में एचडी, फुल एचडी और क्वाड एचडी रेज़ल्यूशन का डिस्प्ले हो सकता है। इन स्मार्ट वन प्ल्स टीवी में बेहद पतले बेजल, डॉल्बी वीज़न और डॉल्बी ऐटमॉस का सपोर्ट और काफी स्लिम बॉडी मिलेगी। इसके साथ ही वन प्लस टीवी में शानदार सिनमैटिक डिस्प्ले होगा।
 

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इसके अलावा, अभी इसके कोई और फीचर्स का खुलासा तो नहीं किया गया है। परंतु माना जा रहा है कि मार्केट में वन प्लस स्मार्ट टीवी का मुकाबला अपने मौजूदा कंपटीटर यानी शाओमी टीवी, नोकिया टीवी व रीयलमी टीवी से होने वाला है। ऐसे में देखना होगा कि कौन किसको कितनी टक्कर देने वाला है।

- शैव्या शुक्ला




सामान्य संस्कृति
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रातभर में पिंपल से निजात पाने के लिए ट्राई करें ये टिप्स

महिलाएं पिंपल को लेकर काफी परेशान रहती है। पिंपल से सारा लुक खराब हो जाता है। ऐसे में पिंपल को छिपाने के लिए फाउंडेशन का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप पिंपल की परेशानी से एक राज में निजात पाना चाहती है तो ट्राई करें ये टिप्स।

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एक बार फिर पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार माल्टा

माल्टा, जो अब एक कोरोना वायरस मुक्त देश घोषित हो चुका है, एक बार फिर अपने यहां पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार हो गया है। यह एक स्वतंत्र भूमध्यसागरीय द्वीप है, जो अपनी प्राचीन इमारतों, खूबसूरत परिदृश्य और विशाल चट्टानों के लिए विख्यात है, अपनी पर्यटन गतिविधियों को फिर से जुलाई 1 से शुरू कर चुका है। यह व्यवस्था और अनुमति फिलहाल सिर्फ 22 यूरोपीय देशों के नागरिकों को दी जाएगी जो 1 जुलाई से माल्टा की अद्भुत यात्रा का आनंद उठा सकेंगे। लेकिन संभवतः जुलाई 15 से अन्य उड़ान जगहों के लिए यात्रा प्रतिबन्ध हटा दिए जाएंगे। माल्टा के अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे का परिचालन भी जुलाई माह से शुरू हो जायेगा। हालाँकि, सभी पर्यटकों को अनिवार्य रूप से एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ेगा।

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माल्टा आने वाले सभी पर्यटकों को एक स्व-घोषणा पत्र भरना होगा जिसमे वे अपनी पिछली 30 दिन की यात्रा का विस्तृत विवरण देंगे। हालांकि, उन्हें क्वारंटाइन के लिए नहीं कहा जायेगा। प्रत्येक यात्री को फेस शील्ड और मास्क पहनना अनिवार्य होगा और साथ ही साथ शारीरिक दूरी का पालन भी यथासंभव करना होगा, हाँ लेकिन कम से कम २ मीटर की दूरी हर एक यात्री को एक दूसरे से बनानी जरूरी होगी। थोड़ी सी ढील ज़रूर दी जा सकती है अगर कोई विशेष स्थिति उत्पन्न होती है तो। 
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि माल्टा अपने निर्धारित समय तथा कार्यक्रम के अनुसार द्वीपों पर चलने वाले सार्वजनिक परिवहन के साथ कोमिनो और गोज़ो द्वीप के लिए अपनी बेड़ों और नौकाओं का संचालन करेगा।
माल्टा के बारे में 
माल्टा एक ऐतिहासिक राष्ट्र है जो रोम, मूवर्स, सेंट जॉन, फ्रेंच और ब्रिटिश सहित शासकों के उत्तराधिकार से संबंधित है। यह सिसिली (इटली) और उत्तरी अफ्रीकी तट के बीच केंद्रीय भूमध्य सागर में स्थित एक द्वीप है। इसकी राजधानी वैल्लेट्टा है। माल्टा दुनिया का दसवाँ सबसे छोटा और पांचवां सबसे घनी आबादी वाला देश है। आधिकारिक और राष्ट्रीय भाषा माल्टीज़ है, जो सिसिली के अमीरात के दौरान विकसित सिसिलियन अरबी से उतरी है, जबकि अंग्रेजी दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में कार्य करती है। माल्टा 1813 में एक ब्रिटिश उपनिवेश बना था, जो जहाजों के लिए एक स्टेशन और ब्रिटिश भूमध्यसागरीय बेड़े के लिए मुख्यालय के रूप में सेवा कर रहा था। यूरो यहाँ की करेंसी है।
21 सितंबर 1964 को माल्टा के प्रधानमंत्री जॉर्ज बोरो ओलिवियर के नेतृत्व में यूनाइटेड किंगडम के साथ गहन वार्ता के बाद माल्टा ने एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अपनी स्वतंत्रता हासिल की। माल्टा यूरोपीय संघ में 1 मई 2004 को शामिल हो गया।  माल्टा में भूमध्यसागरीय जलवायु होती है। औसत वार्षिक तापमान दिन में 23°C और रात में 15.5°C रहता है। सबसे ठंडे महीने में यानी जनवरी- दिन में अधिकतम अधिकतम तापमान 12 से 18°C और रात में न्यूनतम 6 से 12°C रहता है। सबसे गर्म महीने में- अगस्त- दिन में अधिकतम तापमान 28 से 34°C और रात में न्यूनतम 20 से 24°C रहता है। यूरोप महाद्वीप में सभी राजधानियों के बीच, वाल्लेट्टा-माल्टा की राजधानी में सबसे गर्म सर्दियाँ  होती हैं।

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माल्टा के दर्शनीय स्थल 
माल्टा एक बहुत खूबसूरत और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहाँ प्रति वर्ष लगभग 1.6 मिलियन पर्यटक आते हैं, जो कि यहाँ के निवासियों की तुलना में तीन गुना अधिक है। वर्षों से पर्यटन के बुनियादी ढांचे में अत्यधिक वृद्धि हुई है। वैसे तो माल्टा में कई सारे दर्शनीय स्थल हैं, लेकिन सबसे प्रमुख और लोकप्रिय स्थल हैं- 
1. गोजो का द्वीप
2. सेंट जॉन को-कैथेड्रल
3. पोपये गाँव
4. गोल्डन बे
5. सेंट अगाथा टॉवर
6. मेलिहा का पैरिश चर्च
7. नील जल परिशोधन कुंड
8. टार्क्सियन मंदिर
9. द मन्जद्र मंदिर
10. हगार किम मंदिर
- जेपी शुक्ला

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पार्लर जैसा चाहिए रिजल्ट तो मैनीक्योर करते हुए ना करें यह गलतियां

अमूमन अपने हाथों का ख्याल रखने के लिए मैनीक्योर करती हैं। शरीर के अन्य हिस्सों की अपेक्षा हाथों को अधिक केयर की जरूरत होती है। दरअसल, महिलाओं को काफी समय अपने हाथों को पानी व डिटर्जेंट में रखना पड़ता है और साबुन व पानी की मार के कारण उनके हाथ रूखे हो जाते हैं। इस स्थिति में हाथों का ख्याल रखने का सबसे अच्छा तरीका है मैनीक्योर करना। वैसे तो मैनीक्योर करवाने के लिए पार्लर का रूख भी किया जा सकता है, लेकिन इन दिनों कोरोना संक्रमण के डर के कारण अभी भी महिलाएं पार्लर जाने से बच रही हैं। ऐसे में अगर आप चाहें तो खुद घर पर भी बेहद आसान तरीके से मैनीक्योर कर सकती हैं। हालांकि आपको कुछ गलतियों से बचना चाहिए। तो चलिए आज हम आपको ऐसे ही कुछ मिसटेक्स के बारे में बता रहे हैं−

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टूल्स को क्लीन ना करना
ब्यूटी केयर एक्सपर्ट बताते हैं कि मैनीक्योर करने के लिए आपको कई तरह के टूल्स को यूज किया जाता है। वैसे तो पार्लर में टूल्स की क्लीनिंग पर खासतौर पर फोकस किया जाता है, लेकिन अगर आप घर पर हैं तो आपको इस जरूरी स्टेप को मिस नहीं करना चाहिए। अगर आप टूल्स को अच्छी तरह क्लीन नहीं करतीं तो ऐसे में उसकी लगी गंदगी व बैक्टीरिया आपके हाथों व नाखूनों में चले जाते हैं। इसलिए इस्तेमाल से पहले हमेशा टूल्स को डिसइंफेक्ट करें और इस्तेमाल के बाद भी उन्हें अच्छी तरह साफ करके ही रखें।
बेस कोट ना लगाना
मैनीक्योर करते हुए एक सबसे जरूरी स्टेप जिसे अक्सर महिलाएं मिस कर देती हैं और वह है बेस कोट लगाना। ब्यूटी केयर एक्सपर्ट के अनुसार, मैनीक्योर करते हुए नेल्स पर बेस कोट लगाना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि बेस कोट आपके नेल्स के लिए एक प्रोटेक्टिव लेयर की तरह काम करता है। आसान शब्दों में समझा जाए तो यह नेल्स का प्राइमर है, इसलिए हर बार मैनीक्योर करते हुए नेलपेंट लगाने से पहले बेस कोट को जरूर लगाएं।

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क्यू−टिप का इस्तेमाल
जब कभी नेलपेंट लगाते हुए आपसे कुछ गड़बड़ होती है तो महिलाएं क्यू−टिप का इस्तेमाल करती हैं। यकीनन यह आपको एक अच्छा आईडिया लगे, लेकिन ब्यूटी केयर एक्सपर्ट इसे सही नहीं मानते। ब्यूटी केयर एक्सपर्ट बताते हैं कि कॉटन के छोटे−छोटे स्टैंड्स आपकी नेल पॉलिश में चिपक जाते हैं, जिससे आपको लुक खराब हो जाता है। इसलिए आप करेक्शन के लिए क्यू−टिप की जगह बेहद थिन मेकअप ब्रश या फिल नेलपेंट रिमूवर का भी सहारा ले सकती हैं।
मिताली जैन

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ब्लड प्रेशर से लेकर कोलेस्ट्रॉल तक को कंट्रोल करता है अलसी, जानिए इस्तेमाल का तरीका

अलसी जिसे तीसी या फ्लैक्स सीड भी कहा जाता है सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। डिलीवरी के बाद अक्सर महिलाओं को अलसी के लड्डू दिए जाते हैं जिससे उन्हें एनर्जी मिलती है। अलसी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कई तरह की बीमारियों से बचाने में कारगर है। चलिए आपको बताते हैं फ्लैक्स सीड के फायदे और उपयोग का तरीका।
अलसी में पोषक तत्व
एक चम्‍मच (7 ग्राम) पिसी हुई अलसी में 1.28 ग्राम प्रोटीन, 2.95 ग्राम फैट, 2.02 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 1.91 ग्राम फाइबर, 17.8 मि.ग्रा कैल्शियम, 27.4 मि.ग्रा मैग्‍नीशियम, 44.9 मि.ग्रा फास्‍फोरस, 56.9 मि.ग्रा पोटैशियम, 6.09 माइक्रोग्राम फोलेट और 45.6 माइक्रोग्राम ल्‍यूटिन और जीएक्‍सेंथिन होता है।

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इन बीमारियों से बचाती है अलसी।
हाई ब्लड प्रेशर में फायदेमंद
एक रिसर्च के मुताबिक, अलसी में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, लिग्नैंस और डायट्री फाइबर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बीपी की समस्या से जूझ रहे मरीजों को अलसी का बीज खाना चाहिए, इससे उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहेगा।
डायबिटीज करे कंट्रोल
अलसी के गुणों पर की गई एक स्टडी के मुताबिक, इसमें फाइबर और म्यूसिलेज नामक तत्व होता है जो शरीर में इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रित करते हैं। अलसी को एंटीडायबिटिक माना गया है यानी यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है।

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दिल की सेहत का ख्याल
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, फाइबर और ओमेगा-3 की अधिक मात्रा डायट में शामिल करने से दिल की सेहत दुरुस्‍त रहती है और लिगनेन नामक तत्व ह्रदय रोगों से बचाता है। ये सारी चीज़ें अलसी में होती है, इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट्स थोड़ी मात्रा में रोजाना की डायट में अलसी को शामिल करने की सलाह देते हैं। 
कोलेस्ट्रॉल कम करता है
अलसी में फाइटोस्‍टेरोल होता है जो आंत में कोलेस्ट्रॉल को अब्जॉर्व होने से रोकता है। अलसी बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करने में भी मददगार है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अलसी के सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल कम हो जाता है जिससे आपको दिल की बीमारियां होने का खतरा भी कम हो जाता है।
महिलाएं के लिए फायदेमंद
अक्सर डिलीवरी के बाद महिलाओं को असली और गोंद के लडूड् दिए जाते हैं यह शरीर को बहुत ताकत देती है। चूकि अलसी की तासीर गर्म होती है इसलिए विशेषज्ञ ठंड में अलसी के लडूड खाने की सलाह देते हैं इससे सर्दी-खांसी और जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है। इसके अलावा 2007 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाली हॉट फ्लैशेज की समस्या को कम करने में अलसी से मदद मिलती है।

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आर्थराइटिस में उपयोगी
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या है तो अलसी खाने से राहत मिल सकती है। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, रुमेटाइड आर्थराइटिस, लुपस आदि बीमारियों में भी अलसी खाने से आराम मिलती है।
कैसे करें अलसी का उपयोग?
- अलसी के बीज को साबूत खाने की बजाय इसका पाउडर बनाकर खाएं, क्योंकि बीच का सेवन करने पर आंत इसके पोषक तत्वों को अब्जॉर्व नहीं कर पाती है।
- अलसी को थोड़ा सा भूनकर उसका पाउडर बनाकर रख लें और रोज़ाना 1-2 चम्चम इसका सेवन करें। इसके पाउडर में नमक, लहसुन और हरी मिर्च मिलाकर आप इसकी चटनी भी बना सकते हैं।
- कभी भी अलसी को कच्चा न खाएं इससे पाचन संबंधी समस्या हो सकती है और अलसी खाने के बाद पर्याप्त पानी ज़रूर पीएं।
- अलसी को पीसकर उसमें ड्राय फ्रूट्स, गुड़ और मूंगफली मिलाकर लड्डू भी बना सकते हैं, लेकिन रोज़ाना 1-2 लड्डू से ज्यादा न खाएं।
- यदि आप मूंग दाल या कोई भी हेल्दी चीला बना रही हैं तो उसमें 1 चम्मच अलसी के बीच मिक्स कर सकती हैं।
- कंचन सिंह